तुर्की की राजधानी अंकारा में चल रहे नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बयान दिया जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। ट्रंप ने साफ कह दिया कि ईरान के साथ जो सीजफायर हुआ था, वो अब उनके लिए पूरी तरह से खत्म हो चुका है। यह खबर आते ही मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से बारूद की गंध आने लगी है। लोग परेशान हैं कि क्या फिर से दोनों देश आमने-सामने आकर बमबारी शुरू कर देंगे।
ईमानदारी से कहें तो अमेरिका-ईरान संबंध हमेशा से ही एक पहेली रहे हैं। अभी पिछले महीने ही दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसे इस्लामाबाद मेमोरेंडम कहा गया। इस समझौते का मकसद था कि होर्मुज जलमार्ग को जहाजों के लिए सुरक्षित रखा जाए और परमाणु कार्यक्रम पर शांति से बात की जाए। लेकिन यह शांति ज्यादा दिन नहीं टिक पाई। होर्मुज स्ट्रेट में तीन कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों पर एयर स्ट्राइक कर दी। इसके बाद ट्रंप का यह गुस्सा फूट पड़ा। Building on this topic, you can also read: Why Abandoned Dungeness Crab Traps Cost Fishermen Their Livelihoods.
सीजफायर टूटने के पीछे की असली कहानी क्या है
तनाव अचानक से नहीं बढ़ा। इसके पीछे दोनों तरफ से हुई बड़ी सैन्य कार्रवाइयां हैं। अमेरिकी सेना का दावा है कि ईरानी ताकतों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते में जहाजों को निशाना बनाया, जो सीजफायर का खुला उल्लंघन था। जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सेंटकॉम ने ईरान के मिसाइल ठिकानों और रडार सिस्टम को तबाह कर दिया।
इधर ईरान भी चुप नहीं बैठा। उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। जब नाटो बैठक में पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या अब सीजफायर सच में खत्म हो गया है, तो उन्होंने सीधा जवाब दिया कि मेरे हिसाब से यह खत्म है। ट्रंप ने ईरान के नेताओं को बहुत खरी-खोटी सुनाई और उन्हें धोखेबाज तक कह डाला। Analysts at Al Jazeera have shared their thoughts on this matter.
बातचीत के रास्ते अब भी खुले हैं या बंद
ट्रंप के गुस्से वाले बयान के बीच एक बात ध्यान देने वाली है। उन्होंने कहा कि उनके नेगोशिएटर्स यानी बातचीत करने वाले अधिकारी अभी भी बात जारी रख सकते हैं। ट्रंप का यह पुराना तरीका है। एक तरफ वो पूरी ताकत से डराते हैं, और दूसरी तरफ टेबल पर आने का विकल्प भी खुला रखते हैं।
कहा जा रहा है कि एयर फ़ोर्स वन से यात्रा करते समय ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरानी अधिकारियों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की है क्योंकि वे कोई न कोई डील चाहते हैं। पर ट्रंप अब आसानी से मानने के मूड में नहीं दिख रहे। उनका कहना है कि ईरान के नेता बाहर मीडिया के सामने कुछ और कहते हैं और बातचीत की टेबल पर कुछ और।
इस पूरे घटनाक्रम का दुनिया पर क्या असर होगा
होर्मुज जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। जैसे ही सीजफायर टूटने की खबर आई, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया। अगर यह तनाव आगे बढ़ा तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ेगा, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।
अमेरिकी संसद भी ट्रंप के इन फैसलों को लेकर बंटी हुई है। कुछ सीनेटरों का मानना है कि ट्रंप बिना कांग्रेस की अनुमति के एक नया युद्ध शुरू कर रहे हैं। पिछले महीने ही संसद ने ट्रंप को ईरान के खिलाफ बिना मंजूरी सैन्य एक्शन लेने से रोकने के लिए एक प्रस्ताव भी पास किया था। लेकिन ट्रंप अपनी मर्जी के मालिक हैं।
आगे क्या होगा, यह तो आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा। फिलहाल अमेरिकी सेना हाई अलर्ट पर है और ईरान ने भी अपनी मिसाइलें तैयार रखी हैं।
अपनी राय मजबूत रखें और वैश्विक राजनीति में होने वाले इन बदलावों पर नजर बनाए रखें क्योंकि मिडिल ईस्ट की यह चिंगारी पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकती है।