अमेरिका का ईरान पर लगातार पांचवीं रात हमला और गिरती सीजफायर की उम्मीदें

अमेरिका का ईरान पर लगातार पांचवीं रात हमला और गिरती सीजफायर की उम्मीदें

पश्चिम एशिया में बारूद की गंध गहरी होती जा रही है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों ने लगातार पांचवीं रात ईरान के कई सैन्य और तटीय ठिकानों पर भारी बमबारी की। बंदर अब्बास से लेकर सीरीक और केश्म द्वीप तक धमाकों की आवाजें गूंज रही हैं।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर शुरू हुआ यह तनाव अब सीधी सैन्य भिड़ंत में बदल चुका है। अगर आप सोच रहे हैं कि यह सिर्फ एक और मामूली सीमावर्ती झड़प है, तो आप गलत हैं। यह हाल के महीनों का सबसे खतरनाक मोड़ है।

बंदरगाहों और मिसाइल साइटों को क्यों बनाया निशाना

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने साफ किया है कि पांचवीं रात के इन हमलों का मकसद ईरान की उन क्षमताओं को तोड़ना है जो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए खतरा बनी हुई हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग के मुताबिक हवाई हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी नेटवर्क, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और ड्रोन लॉन्च पैड तबाह किए गए हैं।

धमाकों का असर कितना भयानक था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बंदर अब्बास और सीरीक में रात भर सायरन बजते रहे। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केवल केश्म द्वीप और सीरीक के आसपास ही दर्जन भर से अधिक मिसाइलें और प्रोजेक्टाइल गिरे।

ईरान का सबसे रणनीतिक कंटेनर पोर्ट बंदर अब्बास के पास ही स्थित है। यहां से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। जब इस जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले बढ़े, तो वाशिंगटन ने अपनी सैन्य ताकत का पूरा इस्तेमाल करने का फैसला किया।

88 दिनों का सीजफायर और टूटता समझौता

कुछ ही हफ्ते पहले दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौता हुआ था। मकसद था कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों का रास्ता सुरक्षित रहे और दोनों पक्ष बातचीत की टेबल पर आएं। लेकिन यह सीजफायर कागज पर ही सिमट कर रह गया।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जब व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया, तो अमेरिका ने भी अपनी रणनीति बदल ली। वाशिंगटन ने न केवल हमलों की तीव्रता चार से पांच गुना बढ़ा दी, बल्कि ईरान के समुद्री बंदरगाहों की फिर से नाकाबंदी भी शुरू कर दी।

ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई में कोई कमी नहीं दिख रही। बहरीन, कुवैत और कतर में मौजूद अमेरिकी ठिकानों के पास मिसाइल और ड्रोन हमले की खबरें आई हैं। ईरान का साफ कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी आक्रामकता नहीं रोकता, वह किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार नहीं है।

आम लोगों पर मंडराता पानी और बिजली का संकट

युद्ध का सबसे कड़वा सच यह है कि इसका खामियाजा हमेशा आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है। दक्षिणी ईरान के तटीय इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है। लगातार होते धमाकों ने पहले से जर्जर नागरिक बुनियादी ढांचे को हिलाकर रख दिया है।

सीरीक और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जून में हुए हमलों के दौरान पानी के मुख्य संयंत्रों को नुकसान पहुंचा था, जिसकी मरम्मत अब तक पूरी नहीं हो पाई है। स्थानीय निवासी महंगा पानी खरीदने को मजबूर हैं और हर रात नए धमाकों के खौफ में जी रहे हैं।

इसके अलावा, अगर अमेरिका ईरान के बिजली घरों और पुलों जैसी नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाने की अपनी चेतावनी पर अमल करता है, तो स्थिति मानवीय त्रासदी में बदल सकती है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर असर

इस सैन्य टकराव का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहने वाला। जैसे ही स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तनाव बढ़ा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछलने लगीं।

दुनिया भर की रिफाइनरियां और शिपिंग कंपनियां अब अपने जहाजों का मार्ग बदलने पर विचार कर रही हैं। केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते से जहाजों को भेजने का मतलब है माल ढुलाई की लागत में भारी बढ़ोतरी। इससे भारत सहित कई एशियाई और यूरोपीय देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ना तय है।

आगे क्या होगा और दुनिया को किस बात का डर है

आने वाले दिन बेहद नाजुक हैं। यदि दोनों पक्ष तुरंत संयम नहीं दिखाते और कूटनीतिक रास्ते पर वापस नहीं लौटते, तो यह सीमित सैन्य संघर्ष पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है।

स्थानीय स्तर पर अपनी तैयारी पुख्ता रखें और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नज़र बनाए रखें। जो लोग मध्य पूर्व व्यापार या ईंधन आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े हैं, उन्हें तत्काल वैकल्पिक योजनाओं पर काम शुरू कर देना चाहिए।

OZ

Owen Zhang

A trusted voice in digital journalism, Owen Zhang blends analytical rigor with an engaging narrative style to bring important stories to life.