अमेरिकी चुनाव में चीनी दखल के दावों का पूरा सच और बीजिंग का तीखा जवाब

अमेरिकी चुनाव में चीनी दखल के दावों का पूरा सच और बीजिंग का तीखा जवाब

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अमेरिकी चुनावी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम से दिए अपने 25 मिनट के संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि चीन ने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में सीधे तौर पर हस्तक्षेप किया था. उन्होंने कुछ गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया कि चीन के पास लगभग 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का डेटा है. लेकिन बीजिंग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. चीनी विदेश मंत्रालय ने इसे पूरी तरह मनगढ़ंत और चीन की छवि खराब करने वाला बताया है.

यह पूरा मामला सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है. असल में यह दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे रिश्तों को और उलझाने वाला है. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब रिपब्लिकन पार्टी आने वाले मिडटर्म चुनावों की तैयारियों में जुटी है.

बीजिंग का पलटवार, हम दूसरों के मामलों में दखल नहीं देते

ट्रंप के भाषण देने से ठीक पहले ही चीनी दूतावास और फिर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने मोर्चा संभाल लिया था. लिन जियान ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चीन की अमेरिकी चुनावों में कोई दिलचस्पी नहीं है और न ही उसने कभी ऐसा किया है. उन्होंने साफ लहजे में अमेरिका को खुद के गिरेबान में झांकने और बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करने की नसीहत दे डाली.

चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू चांग ने भी पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि चीन हमेशा से दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल न देने की नीति पर चलता रहा है. चीनी अधिकारियों का मानना है कि अमेरिकी चुनाव पूरी तरह वहां के नागरिकों का आंतरिक मामला है और वे ही अपनी सरकार चुनते हैं.

क्या वाकई ट्रंप के पास कोई पुख्ता सबूत है?

ट्रंप ने जिन दस्तावेजों को सार्वजनिक करके "सनसनीखेज" खुलासे का दावा किया था, अमेरिकी इंटेलिजेंस और स्वतंत्र विशेषज्ञों ने उनकी हवा निकाल दी है. ट्रंप का कहना था कि चीन ने 22 करोड़ मतदाताओं के नाम, पते और पंजीकरण की जानकारी चुराई है. लेकिन सुरक्षा मामलों के जानकारों ने बताया कि अमेरिकी वोटर फाइलों का यह डेटा कोई खुफिया जानकारी नहीं है. इसे अमेरिका में कोई भी राजनीतिक सलाहकार या आम व्यक्ति कानूनी रूप से खरीद सकता है.

इसके अलावा, ट्रंप द्वारा पेश किए गए कुछ दस्तावेज तो अमेरिकी चुनाव से संबंधित भी नहीं थे. उदाहरण के लिए, डीक्लासिफाइड फाइलों में से एक दस्तावेज वेनेजुएला के चुनाव से जुड़ा हुआ था.

खुद अमेरिकी खुफिया एजेंसियां क्या मानती हैं?

2021 में आई नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल (NIC) की रिपोर्ट ट्रंप के इन दावों का खंडन करती है. इस रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि किसी विदेशी ताकत ने 2020 के चुनाव में वोटिंग मशीन, वोटिंग पैटर्न या नतीजों से छेड़छाड़ की हो.

  • सहमति: खुफिया समुदाय का मानना था कि चीन ने जानबूझकर इस चुनाव में सीधा दखल नहीं दिया क्योंकि उसे पता था कि पकड़े जाने पर अमेरिका-चीन संबंध पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे.
  • दूसरा पक्ष: हालांकि, साइबर सुरक्षा के कुछ अधिकारियों का एक अलग मत भी था. उनका मानना था कि चीन ने सोशल मीडिया और सरकारी बयानों के जरिए ट्रंप की छवि को थोड़ा नुकसान पहुंचाने की कोशिश जरूर की थी, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में कोई तकनीकी हस्तक्षेप नहीं किया.

चुनाव सुधार और राजनीतिक रस्साकशी

यह पूरा विवाद सिर्फ चीन और अमेरिका के कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे अमेरिका की घरेलू राजनीति भी काम कर रही है. ट्रंप इस समय 'सेव एक्ट' (Save Act) जैसे कड़े चुनावी नियमों को लागू करवाने के लिए दबाव बना रहे हैं.

डेमोक्रेटिक पार्टी और कमला हैरिस जैसे नेताओं ने ट्रंप के इन आरोपों को चुनावी हथकंडा बताया है. उनका आरोप है कि ट्रंप आज भी 2020 की अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और नए नियम लाकर मतदाताओं को परेशान करना चाहते हैं.

आगे क्या होगा?

इस विवाद के बावजूद, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सितंबर में अमेरिका दौरा प्रस्तावित है. हालांकि, ट्रंप की इस बयानबाजी ने बीजिंग को नाराज जरूर किया है और चीनी प्रवक्ताओं ने साफ कर दिया है कि अगर रिश्ते सुधारने हैं, तो चुनाव में चीन को घसीटना बंद करना होगा.

अगर आप वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के इस बदलते स्वरूप को करीब से समझना चाहते हैं, तो दोनों देशों के आधिकारिक बयानों और खुफिया रिपोर्ट्स का निष्पक्ष अध्ययन करते रहें. राजनीतिक बयानों के शोर से अलग असल तथ्यों पर नजर रखना ही सबसे सही तरीका है.

MD

Michael Davis

With expertise spanning multiple beats, Michael Davis brings a multidisciplinary perspective to every story, enriching coverage with context and nuance.